da तनाव को दूर करने के योगासनों की पूरी जानकारी हिंदी में

तनाव को दूर करने के योगासनों की पूरी जानकारी हिंदी में

               

                      योगासन




आधुनिक जीवन शैली और तरक्की की होड़ के कारण तनाव बढ़ रहा है। शरीर में कार्टिसोल, एड्रिनलिन हार्मोन के ज्यादा बनने से तनाव बढ़ता है। नियमित योग करने से ये हार्मोन घटते हैं। इससे तनाव घटता है। इसके लिए नियमित अभ्यास जरूरी है। योगासन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी है योगा से सारी बीमारियां दूर हो जाती है।


  • सुखासन-



पैरों को सिधे कर बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। पैरों को मोड़कर एक दूसरे पर रखें। दाएं पैर को मोड़े और बाएं पैर की जांघ के नीचे या अपने बाएं पैर के घुटने के नीचे रखें। गर्दन सीधी रखें। हाथों को ध्यान की मुद्रा में घुटनों पर रखें। आंखें बंद कर शरीर को ढीला रखें। गहरी सांस लें। मंत्रोचार भी कर सकते हैं। 10 मिनट तक ये योगासन कर सकते है।

सावधानी:- इस आसन से घुटनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से उनकी क्षमता बढ़ती है। जिन्हें घुटनों में रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की दिक्कत हो तो वे यह आसन न करें। एक ही मुद्रा में लंबे समय तक न बैठे। किसी योग विशेज्ञ की निगरानी में यह आसन करें।


  • पश्चिमोत्तानासन:-



पश्चिमोत्तानासन का अर्थ पीछे की ओर व उत्तान का अर्थ खींचना है। बैठकर दोनों पैरों को सीधे फैलाएं। पैर सीधे वे आपस में मिले हो। साथ ही गर्दन, सिर वे रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। इसके बाद हथेलियों को घुटनों पर रखें। सिर व धड़ को आगे झुकाए। घुटनों को बिना मोड़े हाथों की उंगलियों से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें। गहरी सांस लें। इसके बाद सिर व माथे को दोनों घुटनों से छूने की कोशिश करें। बाहों को झुकाए। कोहनी से जमीन को छूने की कोशिश करें। सांस छोड़ दे। थोड़ी देर बाद पूर्व मुद्रा में आएंं। ये आसन तीन-चार बार करें।

सावधानी:- स्लिप डिस्क, साइटिका, अस्थमा और अल्सर के मरीजों को आसन नहीं करना चाहिए। यदि पेट के किसी अंग का ऑपरेशन हुआ हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए। इस आसन से पेट व कुल्हे की चर्बी घटती है। इससे पाचन क्रिया भी बेहतर होती है।


  •  बालासन:-



वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएंं। इसके बाद धीरे से आगे की ओर झुके। माथा जमीन को छू जाए। धीरे-धीरे सांस छोड़ें। हाथ पीछे की ओर ले जाए। इसके बाद धीरे-धीरे सीने को जांघों कि औऱ दबाव देकर लाएंं। सीना दोनों जांघों से छूना चाहिए। हथेलियां खुली होनी चाहिए। इस मुद्रा में लगभग 1 मिनट तक रहे। धीरे-धीरे सांस लेते रहें। इस दौरान 4 से 12 बार गहरी सांस लें और छोड़ दे। इसके बाद धीरे-धीरे क्रमशः पूर्व मुद्रा में लौटे।

सावधानी:-  कमर में जोड़ो संबंधी बीमारी, गर्भावस्था व डायरिया की समस्या में यह आसन न करें। नियमित करने से चक्कर आने व हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में आराम मिलता है। तनाव दूर होता है, मस्तिष्क शांत रहता है। माइग्रेन, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन मैं भी फायदा मिलता है।



  • शवासन:-



जमीन पर पीठ के बल सीधे लेटें। हथेलियों को शरीर से सटाकर रखें। हथेलियां खुली रखें। पैरों को सीधा रखें। इसमें एक फुट का अंतर रखें। आंख बंद रखें। सिर वे रीढ़ को बिल्कुल सीधा रखें। कोई शारीरिक गतिविधि ने करें। शांतिपूर्ण लेटे रहे। सिर से पैर तक ध्यान केंद्रित करें। छोड़ते समय महसूस करें कि तनाव, अवसाद व चिंता शरीर से बाहर निकल रहा है। 5 मिनट तक यह अभ्यास करें।

 लाभ:- गर्भवती महिलाएं सिर के नीचे तकिया लगा कर करें। नींद नहीं आनी चाहिए। इससे शरीर ऊतकों, कोशिकाओं की मरम्मत करता है। तनाव घटता है। एकाग्रता बढ़ती है। काम में मन अधिक केंद्रित होता है।

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